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MIM के पूर्व अध्यक्ष फारूक शाब्दी के अनशन के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल; जनाधार पर उठे सवाल?

सोलापुर | प्रतिनिधि

सोलापुर में AIMIM के पूर्व अध्यक्ष फारूक शाब्दी के अनशन के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। फारुक शाब्दी के विपक्षी दलों का दावा है कि इस अनशन को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला, जिसके चलते उनके नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अनशन समाप्त कराने पहुंचे शिवसेना शिंदे गुट के नगरसेवक अमोल बापू शिंदे की सोलापुर मध्य विधानसभा क्षेत्र में चर्चा तेज हो रही है । सोलापुर के कई सोशल मीडिया पर भी उनके नाम की चर्चा बढ़ती दिखाई दे रही है। जब की यही सोलापुर शहर मध्य विधानसभा क्षेत्र से सन 2019 और 2024 में MIM की ओर से फारूक शाब्दी चुनाव लड़ के भारी वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे थे।

इस बीच, फारूक शाब्दी के दोबारा MIM में शामिल होने की चर्चाएं भी चल रही हैं। हालांकि, राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि MIM पार्टी के कुछवरिष्ठ नेताओं की ओर से उन्हें सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। और MIM नगरसेवक और कार्यकर्ता, पदाधिकारी भी उनका अब खुलकर विरोध करते नजर आ रहे है।

फारूक शाब्दी ने किये अनशन और आंदोलन पर अपने घोषित उद्देश्य को हासिल नहीं कर पाए, इसलिए राजनीतिक हलकों में इसे दिशाहीन आंदोलन बताया जा रहा है। साथ ही, आंदोलन के पीछे बताए जा रहे मास्टरमाइंड द्वारा अब भी राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश किए जाने की चर्चा भी जारी है।

इसी बीच फारूक शाब्दी का अनशन बीजेपी पार्टी के विरोध में नजर आ रहा था मगर बीजेपी के वरिष्ठ नेता तथा सोलापुर के माजी पालकमंत्री विजय देखमुख की उपस्थिति कुछ और बयान करती नजर आई ।  फारूक शाब्दी का अनशन सोलापुर महानगरपालिका द्वारा मुस्लिम समाज के कब्रस्तान को निधि मिलने को लेकर था , और महापौर विनायक kondyal इस अनशन को खत्म करना और समाज को निधि देने के मांग थी मगर महापौर ने सोलापुर के  एक पत्रकार के कॉल रिकॉर्डिंग में कहा कि , फारूक शाब्दी को हमने कहा था हम सभी समुदाय को लेकर चल रहे है , ऐसा कुछ मामला होगा तो हम निधि देंगे मगर आप उसपर सियासत न करे ऐसा अपील की थीं मगर फिरभी फारूक शाब्दी सियासत कर रहे है ऐसा स्पष्ट रूप से कहा था , इस पर खूब राजकीय चर्चा हुवी।

एक समय जो जनाधार फारूक शाब्दी के साथ था, उसे दोबारा हासिल करने के लिए वे और उनके समर्थक प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इन प्रयासों को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है, ऐसी भी चर्चा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोलापुर मध्य विधानसभा क्षेत्र में इस समय फारूक शाब्दी की तुलना में शिवसेना नगरसेवक अमोल बापू शिंदे के नाम की अधिक चर्चा हो रही है।

राजनीतिक स्तर पर यह भी चर्चा है कि MIM को वोट देने वाले लगभग 62 हजार मतदाता असमंजस की स्थिति में हैं।

इस दौरान MIM के कुछ नगरसेवकों ने भी फारूक शाब्दी के आंदोलन से दूरी बनाए रखी। साथ ही, इस पूरे मुद्दे को गलत तरीके से संभाले जाने की चर्चा भी सोलापुर में हो रही है।

फारूक शाब्दी के साथ पहले काम कर चुके कुछ कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन के बाद उन पर खुलकर आलोचना की है। इन घटनाक्रमों के बाद सोलापुर की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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